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अतिशय  : वि० [सं० अति√शी (सोना) +अच्] [भाव० अतिशयता, अतिशय्य] १. बहुत। ज्यादा। २. यथेष्ट। ३. आवश्यकता से बहुत अधिक। (एक्सेसिव) पुं० एक अलंकार जिसमें किसी वस्तु की उत्तरोत्तर सम्भावना या असम्भावना दिखलाई जाती है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
अतिशयता  : स्त्री० [सं० अतिशय+तल्-टाप्] ‘अतिशय होने की अवस्था या भाव। परम अधिकता
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अतिशयनी  : स्त्री० [सं० अति शी+ल्युट्-अन-डीष्] एक प्रकार का छंद या वृत्त।
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अतिशयी (यिन्)  : वि० [सं० अति √शी+णिनि] १. प्रधान। श्रेष्ठ। २. अत्यधिक। बहुत ज्यादा।
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अतिशयोक्ति  : स्त्री० [सं० अतिशय-उक्ति, तृ० त०] १. बढ़ा-चढ़ाकर तथा अपनी ओर से बहुत कुछ मिलाकर कही हुई बात। (एग्जैजरेशन) २. एक अलंकार जिसमें किसी की निंदा, प्रशंसा आदि करते समय कोई बात साधारण से बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर कही जाती है। (हाइपरबोल) जैसे—आपके मुँह से जो कुछ निकलता था, वही ब्रह्य वाक्य हो जाता था। (इसके रूपकातिशयोक्ति आदि कई भेद हैं।)
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अतिशयोपमा  : स्त्री० [सं० अतिशय-उपमा, तृ० त०] उपमा अलंकार का वह प्रकार या भेद जिसमें किसी वस्तु की उपमा एक चीज को छोड़कर और दूसरी किसी चीज से दी ही न जा सके।
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