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शब्द का अर्थ

अनेक  : वि० [सं० न-एक, न० त०] १. (संख्या में) एक नहीं बल्कि उससे अधिक। कई। जैसे—आपको पहले भी कई बार समझाया गया है। २. (संख्या में) बहुत। जैसे—आकाश में अनेक तारागण या नक्षत्र समूह हैं। पद—अनेकानेक=बहुत अधिक।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
अनेक-चर  : वि० [सं० अनेक√चर् (गति, भक्षण)+ट] झुंड या समूह बनाकर रहनेवाला। (जीव या जंतु)।
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अनेक-चित्त  : वि० [ब० सं० ] १. जिसका मन किसी एक स्थान, मत, विचार-आदि पर न टिकता हो। चंचल चित्तवाला। २. अनेक मनोरथ। बहु-संकल्प।
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अनेकज  : वि० [सं० अनेक√जन् (उत्पन्न करना)+ड] जिसका कई बार जन्म हुआ हो। पुं० पक्षी।
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अनेकत्र  : अव्य० [सं० अनेक+त्रल्] कई स्थानों पर। कई जगह।
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अनेकप  : पुं० [सं० अनेक√पा(पीना)+क] हाथी।
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अनेक-भार्य  : पुं० [ब० सं० ] वह जिसकी कई भार्याएँ (पत्नियाँ) हों।
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अनेक-मुख  : पुं० [ब० सं० ] १. वह जिसके कई मुख हों। २. वह जिसके कई मुख या प्रवृत्तियाँ कई ओर हों।
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अनेक-रूप  : पुं० [ब० सं० ] वह जिसके कई आकार, प्रकार, भेद या रूप हों। अनेक रूप धारण करनेवाला, परमेश्वर। वि० १. परिवर्तनशील। २. अस्थिर।
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अनेक-लोचन  : पुं० [ब० सं० ] १. वह जिसके कई नेत्र हों। जैसे—इंद्र, शिव। २. विराट् पुरुष।
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अनेक-वचन  : पुं० [कर्म० स०] बहुवचन। (व्या०)
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अनेक-वर्ण  : वि० [ब० सं० ] जिसके कई रंग या वर्ण हों। पुं० बीजगणित में ऐसे कई वर्णों या अक्षरों का वर्ग जो अज्ञात राशियों के सूचक हों। जैसे—क+ख-ग=घ।
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अनेक-विध  : वि० [ब० सं० ] जिसमें या जिसके कई प्रकार हों। कई तरह का।
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अनेक-साधारण  : वि० [सं० त०] जो कइयों या बहुतों में समान या साधारण रूप में पाया जाए।
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अनेकांगी (गिन्)  : पुं० [सं० अनेक-अंग, कर्म० स०+इनि] वह जिसके कई या बहुत से अंग, खंड या भाग हों।
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अनेकांत  : वि० [सं० न-एकान्त, न० ब०] (स्थान) जहाँ एकान्त न हों। ‘एकान्त’ का विपर्याय। वि० [सं० न-अन्त,ब० स०] १. जिसके अंत में अनेक हों। अनेक अंतोंवाला। २. जिसका अंत अनेक रूपों में हों। ३. अस्थिर। चंचल।
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अनेकांत-वाद  : पुं० [सं० ष०त०] [वि०, कर्त्ता अनेकांतवादी] जैनदर्शन में स्याद्वाद।
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अनेकाकार  : वि० [सं० अनेक-आकार, ब० स०] जिसके कई रूप हों।
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अनेकाकी (किन्)  : वि० [सं० न-एकाकी, न० त०] जो अकेला न हो। अनेकों से युक्त।
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अनेकाक्षर  : वि० [सं० अनेक-अक्षर, ब० स०] कई अक्षरोंवाला (शब्द)।
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अनेकाग्र  : वि० [सं० न-एकाग्र, न० त०] कई कामों में लगा हुआ।
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अनेकार्थ  : वि० [सं० अनेक-अर्थ, ब० स० कप्] जिसके अनेक अर्थ हों। अनेक अर्थोंवाला (शब्द या वाक्य)
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अनेकार्थक  : वि० [सं० अनेक-अर्थ, ब० स० कप्]=अनेकार्थ।
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अनेकाश्रय  : वि० [सं० अनेक-आश्रय, ब० स०] कइयों के आश्रय में रहनेवाला।
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