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अवतार  : पुं० [सं० अव√तृ+घञ्] १. ऊपर से नीचे की ओर आना। उतरने की क्रिया या भाव। २. शरीर धारण करना। जन्म लेना। ३. पौराणिक क्षेत्र में, ईश्वर (परमात्मा) का भौतिक या मानव रूप धारण करके इस संसार में आना। ४. उक्त प्रकार से धारण किया हुआ शरीर। जैसे—कृष्ण, राम या वाराह का अवतार। ५. वह व्यक्ति जिसके संबंध में यह माना जाता हो कि ईश्वर का अंश और प्रतिनिधि है। ६. अनुवाद। ७. भूमिका। ८. तीर्थ।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
अवतारण  : पुं० [सं० अव√तृ+णिच्+ल्युट्-अन]=अवतारणा।
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अवतारणा  : स्त्री० [सं० अव√तृ+णिच्+णिच्-अन-टाप्] १. ऊपर से नीचे लाने की क्रिया या बाव। उतारना। २. किसी अमूर्त्त या अदृश्य बात या तत्त्व को मूर्त्त, दृश्य, श्रव्य आदि रूपों में लाने की क्रिया या भाव। इंद्रिय गोचर कराने की क्रिया या भाव। जैसे—(क) चित्रपट पर सीता-हरण की अवतारणा। (ख) सितार पर ललित राग की अवतारणा। ३. अनुकरण या नकल करना। ४. अवतरण या उद्धरण के रूप में ग्रहण करना।
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अवतारना  : स० [सं० अवतारण] १. ऊपर से नीचे लाना। उतारना। २. जन्म लेना। ३. प्रस्तुत करना, बनाना या रचना।
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अवतारवाद  : पुं० [सं० ष० त०] वह मत या सिद्धांत कि धर्म की हानि होने पर उस की फिर से स्थापना करने के लिए भगवान जन्म लेकर (या शरीर धारण करके) इस संसार में आते हैं।
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अवतारी (रिन्)  : वि० [सं० अव√तृ+णिनि] १. नीचे आने या उतरनेवाला। २. अवतार धारण करने या लेनेवाला। ३. ईश्वर के अवतार के रूप में माना जानेवाला और अलौकिक गुणों से युक्त (व्यक्ति)। जैसे—महात्मा बुद्ध अवतारी पुरुष माने जाते हैं। पुं० २४ मात्राओं के छंदों की संज्ञा।
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