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ओत  : पुं० [सं० आवे (बुनना)+क्त] कपड़े की बुनावट में वे सूत जो लंबाई के बल लगे रहते हैं। ताना। वि० तारों, सूतों आदि से गुथा या बुना हुआ। पद—ओत-प्रोत-(देखें)। स्त्री० [हिं० अन=हीं+होत=होने की अवस्था] १. न होने की अवस्था या भाव। अभाव। २. कमी। न्यूनता। स्त्री० [सं० अवाप्ति] १. प्राप्ति। लाभ। २. आराम। चैन। सुख। उदाहरण—होत न बितोक होत पञ्वै न ननाकसो...।—तुलसी।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
ओत-प्रोत  : वि० [द्व० स०] १. उसी तरह आपस में खूब गुथा या मिला-जुला जिस तरह कपड़े में ताने और बाने के सूत मिले रहते हैं। २. खूब भरा हुआ। लबालब। पुं० १. कपड़े में का ताना और बाना। २. ऐसा वैवाहिक संबंध जिसमें एक पक्ष का एक लड़का और एक लड़की दूसरे पक्ष की एक लड़की और एक लड़के से ब्याही जाती है। जिस घर में कन्या देना, उसी घर से एक कन्या लेना। बदले का विवाह।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
ओता  : वि० [हिं० उतना] [स्त्री० ओती] उतना। वि० [हिं० ओत] १. जो किसी की तुलना में कम या न्यून हो। २. अनुपयुक्त। ३. असमर्थ। उदाहरण—नासिक मोती जगमग जोती। कहती तौ मति होती ओती।—नंददास।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
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ओत्ता  : वि०=उतना।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
ओत  : पुं० [सं० आवे (बुनना)+क्त] कपड़े की बुनावट में वे सूत जो लंबाई के बल लगे रहते हैं। ताना। वि० तारों, सूतों आदि से गुथा या बुना हुआ। पद—ओत-प्रोत-(देखें)। स्त्री० [हिं० अन=हीं+होत=होने की अवस्था] १. न होने की अवस्था या भाव। अभाव। २. कमी। न्यूनता। स्त्री० [सं० अवाप्ति] १. प्राप्ति। लाभ। २. आराम। चैन। सुख। उदाहरण—होत न बितोक होत पञ्वै न ननाकसो...।—तुलसी।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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ओत-प्रोत  : वि० [द्व० स०] १. उसी तरह आपस में खूब गुथा या मिला-जुला जिस तरह कपड़े में ताने और बाने के सूत मिले रहते हैं। २. खूब भरा हुआ। लबालब। पुं० १. कपड़े में का ताना और बाना। २. ऐसा वैवाहिक संबंध जिसमें एक पक्ष का एक लड़का और एक लड़की दूसरे पक्ष की एक लड़की और एक लड़के से ब्याही जाती है। जिस घर में कन्या देना, उसी घर से एक कन्या लेना। बदले का विवाह।
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ओता  : वि० [हिं० उतना] [स्त्री० ओती] उतना। वि० [हिं० ओत] १. जो किसी की तुलना में कम या न्यून हो। २. अनुपयुक्त। ३. असमर्थ। उदाहरण—नासिक मोती जगमग जोती। कहती तौ मति होती ओती।—नंददास।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
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ओत्ता  : वि०=उतना।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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