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कूटन  : स्त्री० [हिं० कूटना] १. कूटने की क्रिया। २. कोई चीज कूटने पर बननेवाला उसका रूप।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
कूटना  : स० [सं० कुट्टन] १. किसी चीज पर इस प्रकार भारी चीज से बार-बार आघात करना कि उसके बहुत छोटे-छोटे टुकड़े हो जाय। जैसे—मसाला कूटना। २. धान को ऊखल में रखकर मूसल आदि से इस प्रकार बार-बार आघात करना कि उसकी भूसी अलग हो जाय। मुहावरा—(कोई चीज) कूट-कूट कर भरना=दबा-दबा कर किसी पात्र में कोई वस्तु अधिक-से-अधिक मात्रा में भरना। (किसी व्यक्ति में) कूट-कूटकर भरा होना=(किसी व्यक्ति में) कोई गुण या दोष बहुत अधिक मात्रा में होना। जैसे—चतुराई तो उसमें कूट-कूट कर भरी हुई है। ३. जोर-जोर से बराबर मारते रहना। खूब ठोंकना या पीटना। ४. टाँकी आदि से आघात करते हुए चक्की सिल आदि का तल इसलिए खुरदुरा करना कि उसमें चीजें अच्छी तरह पिस सकें। ५. बैल या भैसे का अंडकोश आघात से चूर-चूर करके उसे बधिया करना। ६. ऊँट का पैर मोड़कर उसे ऊपरी भाग में बाँधना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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