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गोट  : स्त्री० [सं० गोष्ठ] चुनरी, धोती, लिहाफ आदि के किनारों पर सुन्दरता के लिए लगाई जानेवाली कपड़े की पट्टी। मगजी। स्त्री० [सं० गोष्ठी] गोष्ठी। स्त्री० [सं० गुटक] गोटी( दे०)। स्त्री० [सं० गोष्ठ] गोठ। गोशाला। पुं० छोटा गाँव। खेड़ा।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
गोट-बस्ती  : स्त्री० [हिं० गोट+बस्ती] १. छोटा गाँव। २. छोटी बस्ती।
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गोटा  : पुं० [हिं० गोट] १. रूपहले या सुनहले तारों की बनी हुई वह पट्टी जो गोट के रूप में सिले हुए कपड़ों के किनारों पर टाँकी जाती है। पद-गोटा-पट्ठा (देखें)। २. भुना हुआ धनिया अथवा उसका बीज। ३. भोजन के बाद खाने के लिए एक में मिलाये हुए इलायची, खरबूजे, सुपारी आदि के कतरे हुए छोटे-छोटे टुकड़े। ४. गरी या नारियल का गोला। ५. पेट के अन्दर सूखा हुआ मल। कंडी। पुं० =गोला।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) उदाहरण–(क) चंदा गोटा टीका करि लै सूरा करि लै बाटी।–गोरखनाथ। (ख) औ घूटहिं तँह ब्रज के गोटा।–जायसी। वि० १. पूरा। समूचा। २. कुल। सब। (पूरब)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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गोटा-पट्ठा  : पुं० [हिं० गोटा+पट्ठा] गोटा या पट्ठा नामक बादले की पट्टियाँ जो कपड़ों पर प्रायः साथ-साथ टाँकी जाती है।
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गोटिया-चाल  : स्त्री० [हि० गोटी+चाल] १. कंकड़,पत्थर इत्यादि का छोटा टुकड़ा जिससे लड़के कई तरह के खेल खेलते है। २. लकड़ी हाथीदाँत आदि के बने हुए वे विशिष्ट आकार-प्रकार के टुकड़े जिनसे चौपड़, शतरंज आदि खेलते हैं। नरद। मोहरा। ३. कार्य सिद्ध होने का उपयुक्त अवसर। उदाहरण–सतरू कोटि जो पाइअ गोटी।–जायसी। ४. कार्य सिद्ध करने के लिए चली जानेवाली चाल या की जानेवाली युक्ति। मुहावरा–गोटी जमना या बैठनाचली हुई चाल या की हुई युक्ति का ठीक बैठना और कार्य सिद्ध होने का निश्चय या संभावना होना। गोटी लाल होनायुक्ति ठीक बैठने के कारण कार्य पूरी तरह से सिद्ध होना या पूरा लाभ होना। ५. एक प्रकार का खेल जो ९, १५, १८ या इससे अधिक गोटियों से भूमि पर एक दूसरी को काटती हुई कई आड़ी और सीधी रेखाएँ बनाकर खेला जाता है। पद-गोटियाचाल (देखें)।
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