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चकवा  : पुं० [सं० चक्रवाक, पा० चक्कवाको, प्रा० चक्कवाअ, चकाअ, गु० चको, सि० चकुओ, पं० चक्का, सि० सक्का, ने० चखेवा; मरा० चकवा] [स्त्री० चकई] १. एक प्रसिद्ध जल-पक्षी जिसके संबंध में यह कहा जाता है कि यह रात को अपने जोड़े से अलग हो जाता है। सुरखाब। २. रहस्य संप्रदाय में, मन। पुं० [सं० चक्र] १. एक प्रकार का ऊँचा पेड़ जिसके हीर की लकड़ी बहुत मजबूत और छाल कुछ स्याही लिये सफेद वा भूरी होती है। इसके पत्ते चमड़ा सिझाने के काम में आते हैं। २. जुलाहों की चरखी में लगी हुई बाँस की छड़ी। ३. हाथ में दबा-दबाकर बढा़ई हुई आटे की लोई।
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चकवाना  : अ०=चकपकाना।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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चकवार  : पुं० दे० ‘कछुआ’।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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चकवाह  : पुं०=चकवा।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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