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चार्वाक  : पुं० [सं० चारू-वाक, ब० स०, पृषो० सिद्धि०] १. एक प्रसिद्ध अनीश्वरवादी और नास्तिक विद्वान। बार्हस्पत्य। (चार्वाक दर्शन के रचियता) २. उक्त विद्वान द्वारा चलाया हुआ मत या दर्शन जो ‘लोकायत’ कहलाता है। चार्वाक दर्शन। ३. एक राक्षस जिसने कौरवों के मारे जाने पर ब्राह्मण वेश में युधिष्ठिर की राजसभा में जाकर उनको राज्य के लोभ से भाई-बन्धुओं को मारने के लिए धिक्कारा था और जो उस सभा के ब्राह्मणों के हाथों मारा गया था।
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चार्वाक-दर्शन  : पुं० [मध्य० स०] चार्वाक नामक प्रसिद्ध विद्वान का बनाया हुआ दर्शन-ग्रन्थ जिसमें ईश्वर, पर-लोक, पुनर्जन्म और वेदों के मत का खंडन किया गया है।
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चार्वाक-मत  : पुं० [ष० त०] चार्वाक का चलाया हुआ मत या संप्रदाय।
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