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चाहना  : स्त्री० [हिं० चाह] १. ऐसी वस्तु की प्राप्ति अथवा ऐसे कार्य या बात की सिद्धि की इच्छा करना जिससे संतोष या सुख मिल सकता हो। जैसे– कौन नहीं चाहता की मैं धनी हो जाऊँ। २. किसी से कोई चीज लेने या कोई कार्य कर देने की विनयपूर्ण प्रार्थना करना। जैसै–हम तो आपकी की कृपा दृष्टि चाहते हैं। ३. अधिकार या अनधिकार पूर्वक किसी का या किसी से कुछ लेने की उत्कट या उग्र इच्छा व्यक्त करना। जैसे–मेरे भाई तो मेरी जान लेना चाहता है। ४. अनुराग, प्रेम या स्नेहपूर्वक किसी व्यक्ति को अपने पास और सुख से रखने की अभिलाषा या कामना करना। जैसे–माता अपने छोटे पुत्र को बहुत चाहती है। ५. श्रृंगारिक क्षेत्र में, स्त्री के मन में किसी पुरुष के प्रति क्रमात् कामवासना से युक्त अनुराग या प्रेम का भाव होना। जैसे–राजा अपनी छोटी रानी को सबसे अधिक चाहता था। ६. अनुराग, चाह या प्रेम से युक्त होकर किसी की ओर ताकना या देखना। जोहना। उदा०–अली अली की ओट ह्वै चली भली बिधि चाहि।–बिहारी। ७. साधारण रूप से देखना। दृष्टिपात करना। उदा०–चालिया चंदाणी मग चाहि।–प्रिथीराज। स्त्री० चाहने की अवस्था या भाव। जैसे–आपकी चाहना तो यहाँ भी है।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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