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झक  : स्त्री० [अनु०] १. मन की वह वृत्ति जिसके फलस्वरूप मनुष्य बिना समझे-बूझे और प्रायः हठवश किसी काम में प्रवृत्त होता है। इसकी गिनती कुछ हलके पागलपन में होती है। क्रि० प्र०–चढ़ना।–लगना।–सवार होना। २. दुर्गंध या बू। जैसे–सड़ी तरकारी की झक। वि० [हिं० झकाझक] १. स्वच्छ तथा उज्जवल। २. चमकदार। चमकीला। स्त्री०=झख।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
झककेतु  : पुं०=झषकेतु।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
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झकझक  : स्त्री० [अनु०] व्यर्थ की तकरार या हुज्जत। किचकिच।
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झकझका  : स्त्री० [हिं० झकझक] १. जो बिलकुल साफ या स्वच्छ हो। उज्जवल। जैसे–झकझका कुरता। २. जिसमें ओप या चमक हो। चमकीला।
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झकझकाहट  : स्त्री० [अनु०] ओप। चमक।
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झकझोर  : पुं० [अनु०] १. झकझोरने की क्रिया या भाव। २. हवा का झकोरा या झोंका। ३. झटका। वि० १. झकझोरा हुआ। २. जिसमें किसी तरह का झोंका या गति की तीव्रता हो। तीव्र। तेज।
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झकझोरना  : स० [अनु०] १. किसी चीज या जीव को उठा या पकड़कर इस प्रकार झटकना या जोर-जोर से हिलाना कि वह टूट-फूट जाय या बेदम हो जाय। २. पेड़ या उसकी शाखा को इस प्रकार हिलाना कि उसके पत्ते या फल नीचे गिर पड़ें।
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झकझोरा  : पुं० [अनु०] झटका। धक्का।
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झकझोलना  : स०=झकझोरना।
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झकड़  : पुं०=झक्कड़।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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झकड़ी  : स्त्री० [देश०] वह बरतन जिसमें दूध दूहा जाता है।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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झकना  : अ० हिं० बकना का अनु०। अ० [हिं० झख+ना (प्रत्यय)] झख मारना।
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झकर  : पुं०=झक्कड़।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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झका  : वि०=झक।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
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झकाझक  : वि० [अनु०] १. स्वच्छ तथा उज्जवल। २. चमकीला।
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झकुरना  : अ० [?] उदास होना। (बुंदेल)।
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झकुराना  : अ० [हिं० झकोरा] झकोरा लेना। झूमना। स०=झकोरा देना। हिलाना।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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झकूटा  : पुं० [अनु०] छोटा पेड़। क्षुप।
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झकोर  : स्त्री० [अनु०] झकोरने की क्रिया या भाव।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है) स्त्री०=झकोरा (हवा का झोंका)।
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झकोरना  : अ० [अनु०] हवा का झोंका मारना। स०=झकझोरना।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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झकोरा  : पुं० [अनु०] हवा का झोंका।
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झकोलना  : स० [?] १. डालना। २. मिलाना।
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झकोला  : पुं०=झकोरा।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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झकोला  : पुं० [हिं० झोंका] १. हवा का झोंका। २. तेज हवा के कारण उठनेवाली पानी की लहर। वि० जिसमें कुछ भी कसाव या तनाव न हो। ढीला-ढाला। उदाहरण–चारपाई बिलकुल झकोली थी।–वृन्दावनलाल।
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झक्क  : वि० स्त्री०=झक।
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झक्कड़  : पुं० [अनु०] तेज आँधी। अंधड़। क्रि० प्र०–उठना–चलना। पुं० दे० ‘झक्की’।
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झक्का  : पुं० [अनु०] १. हवा का तेज झोंका। २. तेज आँधी। झक्कड़। (लश०)
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झक्की  : वि० [हिं० झक] जिसे किसी बात की झक या सनक हो। नासमझी से और केवल हठ-वश किसी काम में लगा रहनेवाला। सनकी।
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झक्खड़  : पुं=झक्कड़।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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झक्खना  : अ०=झीखना।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
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