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टीप  : स्त्री० [हिं० टीपना, मि० अं० टिप] १. टीपने की क्रिया या भाव। २. धीरे-धीरे ठोंकने, पीटने या दबाने की क्रिया या भाव। जैसे–गच, छत या दीवार के पलस्तर पर होनेवाली टीप। ३. ईंटों की बनी हुई दीवार, फरश आदि पर पलस्तर न करके केवल उसकी दराजों, संधियों में मसाला भरकर उन्हें बंद करने की क्रिया या भाव। ४.जोर की ध्वनि या शब्द। ५. संगीत में, किसी एक स्वर पर बहुत जोर देते हुए कुछ देर तक किया जानेवाला उसका ऐसा उच्चारण जिसकी तीव्रता बराबर बढ़ती चलती हो। क्रि० प्र०–लगाना। मुहावरा–टीप लड़ाना=ऊँचे स्वर में या गले का पूरा जोर लगाते हुए कोई चीज गाना। ६. पानी मिला हुआ वह दूध जिससे चीनी या शीरा बनाने के समय उसकी मैल साफ की जाती है। ७. हाथी के शरीर पर औषध का किया जानेवाला लेप। ८. सेना की टुकड़ी या दल। ९. गंजीफे के खेल में विपक्षी के एक पत्ते को अपने दो पत्तों से मारने की क्रिया। १॰. स्मरण रखने के लिए संक्षेप में लिखी हुई संक्षिप्त बात या उसका मुख्य अंश। ११. सूचना, व्याख्या या आलोचना के रूप में लिखी हुई कोई बात। (नोट) १२. वह कागज जिस पर दोनों पक्षों की ओर से लेन-देन, व्यवहार आदि से संबंध रखनेवाला कोई निश्चय या उसकी शरतें लिखी रहती हैं। दस्तावेज। लेख्य। १३. वह कागज जिस पर किसी को निश्चित समय पर कुछ धन देने का आदेश या प्रतिज्ञा लिखी हो। जैसे–चेक, हुंडी आदि। १४. जन्म-पत्री। टीपन।वि० बहुत अच्छा या बढ़िया।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
टीपटाप  : स्त्री० [अनु०] १. टीप करने अर्थात् दरजों या दराजों में मसाला भरने का काम। २. दे० ‘टीम-टाम’।
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टीपन  : स्त्री० [हिं० टीपना] कंकड़ काँटे आदि के चुभने के कारण पड़नेवाली गाँठ या घट्ठा। स्त्री०=टीप (जन्म-पत्री)।
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टीपना  : स० [सं० टेपन=फेंकना] १. उंगलियों या हथेलियों से दबाना। जैसे–किसी के पैर या हाथ टीपना। २. कोई चीज ठीक तरह से बनाने या सुन्दर रूप देने के लिए उस पर धीरे-धीरे हलका आघात या प्रहार करना। जैसे–गच या पलस्तर टीपना। ३. ईटों की बनी हुई दीवार, फरश आदि पर सीमेंट आदि का पलस्तर न करके उसकी दराजों या संधियों को बंद करने के लिए उनमें मसाला भरना। ४. हलके हाथों से लेप आदि लगाना। ५. गाने के समय किसी स्वर को बहुत खींचते हुए और पूरी शक्ति लगाकर उसका उच्चारण करना। ६. गंजी के खेल में अपने दो पत्तों से विपक्षी का एक पत्ता मारना। स० [सं० टिप्पनी] १. याद रखने के लिए कुछ लिख या टाँक लेना। २. अंकित करना। निशान लगाना। उदाहरण–कुकुंम चंदन चारु चून ऐपन सौं टीपे।–रत्नाकर।
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