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तुरी  : स्त्री० [सं० तुरगी] १. घोड़ी। २. घोड़े की लगाम पुं० घुड़सवार। स्त्री० [सं० त्वरा] जल्दबाजी। शीघ्रता। वि० स्त्री० जल्दी या तेज चलनेवाली। स्त्री०[ अ० तुर्रा] १. फूलों का गुच्छा। २. मोतियों सूतों आदि का वह झब्बा जो सोभा के लिए पगड़ी आदि में लगाया जाता है। ३. जुलाहों की वह कूँची जिससे वे ताने के सूत बराबर करते हैं। स्त्री०=तुरही।
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तुरी-यंत्र  : पुं० [सं०] वह यंत्र जिसके द्वारा सूर्य की गति जानी जाती है।
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तुरीय  : वि० [सं० चतुर+छ–ईय, चलोप] चतुर्थ। चौथा। स्त्री० १. वाणी का वह रूप या अवस्था जब वह मुँह से उच्चरित होती है। बैखरी। २. प्राणियों की चार अवस्थाओं में से अन्तिम अवस्था जो ब्रह्म में होनेवाली लीनता या मोक्ष है। (वेदान्त)। पुं० निर्गुण ब्रह्म।
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तुरीय-वर्ण  : वि० [ब० स०] (व्यक्ति) जो चौथे वर्ण का अर्थात् शूद्र हो पुं० शूद्र।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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