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तूँबा  : पुं० [सं०तुम्बक] [स्त्री०अल्पा०तूँबी] १.कडुआ गोल का कद्दू। कडुई गोल घीया। तितलौकी। २.उक्त का सूखा हुआ वह रूप जिसके सहारे नदी-नाले आदि पार किये जाते हैं। ३.उक्त को सुखाकर और खोखला करके बनाया हुआ पात्र जो प्रायः साधु-सन्यासी और भिखमंगे अपने पास खाने-पीने की चीजें रखने के लिए रखते हैं। पद–तूँबा पलटी या तूँबा फेरी-इधर की चीजें उठाकर उधर करना या एक की चीजें दूसरों को देना। चोरों चालबाजों आदि का लक्षण। उदाहरण–-ऐसी तूमा(तूँबा) पलटी के गुन नेति नेति स्तुति गावै।-सत्यनारायण।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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