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बाकी  : वि० [अ० बाक़ी] १. जो कुल या समस्त में से अधिकांश निकाल लिये जाने, क्षय अथवा व्यय होने पर बच रहा हो। २. (काम, चीज या बात) जो अभी किये बनाये, होने या कहे जाने को हो। जैसे—बाकी काम कल करूँगा। क्रि० प्र०—पड़ना।—बचना।—रहना। ३. (धन, राशि या रकम) जो अभी किसी को देय हो अथवा किसी से प्राप्य हो। जिसका लेन-देन अभी होने को हो। जैसे—अभी खाते में सै रुपए उनके नाम बाकी है। क्रि० प्र०—निकलना।—पड़ना।—होना। ४. अवधि या समय जो अभी व्यतीत न हुआ हो। जैसे—अभी महीना पूरा होने में चार दिन बाकी है। क्रि० प्र०—रहना। ५. जो अन्त में या सबसे पीछे होने को हो। जैसे—अब तो मरना बाकी है। स्त्री० १. गणित में वह क्रिया जो किसी बड़ी संख्या (या मान) में से छोटी संख्या (या मान) घटाने के लिए की जाती है। एक बड़ी और दूसरी छोटी संख्या का अन्तर निकालने की क्रिया या प्रकार। जैसे—७ में से ५ घटाना या निकालना। २. उक्त क्रिया करने पर निकलनेवाला फल। वह मान या संख्या जो एक बड़ी संख्या में से दूसरी छोटी संख्या घटाने से प्राप्त होती है। जैसे—१0 में से यदि ६ घटाएँ तो बाकी ४. होगा। क्रि० प्र०—निकलना। ३. वह धन या रकम जो अभी वसूल न हुई हो और वसूल की जाने को हो। जैसे—इतना तो ले लीजिए और जो बाकी निकले वह नये खाते में लिख लीजिए। ४. वह जो सबसे अन्त में बचा रहे। जैसे—अब तो यही बाकी है कि उन पर मुकदमा चलाया जाय। ५. अवशेष। अव्य० परन्तु। मगर। लेकिन। जैसे—आपका कहना तो ठीक है बाकी मैं स्वयं चलकर उनके घर नहीं जाऊँगा। (बोल-चाल) पुं० [देश] एक प्रकार का धान।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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