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शब्द का अर्थ

भोरे  : अव्य० [सं० भ्रम या हिं० भूल] भूलकर भी। उदा०—चहत न भरत भूपपद भोरे।—तुलसी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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