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मंदर  : पुं० [सं०√मंद+अर्] १. पुराणानुसार एक पर्वत जिससे समुद्र मथा गया था। मन्दराचल। २. मंदार नामक वृक्ष। ३. स्वर्ग। ४. दर्पण। शीशा। ५. पुराणानुसार कुश द्वीप का एक पर्वत। ६. पुराणानुसार प्रासाद के बीस भेदों में से दूसरा भेद या प्रकार। ७. एक वर्णवृत का नाम जिसमें प्रत्येक चरण में एक भगण (ऽऽ।।) होता है। ८. मोतियों का वह हार जिसमें आठ या सोलह लड़ियाँ हों। वि०=मंद।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
मंदर-गिरि  : पुं० [सं० मध्य० स०] १. मंदराचल पर्वत। २. मुंगेर के पास का एक पहाड़ जहाँ सीता-कुंड नाम का गरम पानी का कुंड और जैनों बौद्धों तथा हिन्दुओं के मंदिर हैं।
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मँदरा  : वि० [सं० मंदर मि० पं० मँदरा=नाटा] [स्त्री० मँदरी] छोटे आकार का। नाटा। पुं० [सं० मंडल] एक प्रकार का बाजा जिसे मंडिल भी कहते हैं।
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मँदरी  : स्त्री० [देश०] खाजे की जाति का एक पेड़।
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