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यमक  : पुं० [सं० यम√कै (प्राप्ति)+क] साहित्य में एक शब्दालंकार जो उस समय माना जाता है जब किसी चरण में एक ही शब्द दो या अधिक बार आता है और हर बार अलग-अलग अर्थ में आता है। जैसे—कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।—बिहारी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
यमकात, यमकातर  : पुं० [सं० यम+हिं० कातर] १. यम का छुरा या खाँड़ा। २. एक प्रकार की तलवार।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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