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शब्द का अर्थ

लडंग  : स्त्री० [हिं० लड़०] १. लड़ी। लड़। २. पंक्ति। कतार। पुं० [?] झुंड। समूह। जैसे—गौओं या घोड़ों का लडंग।
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लडंत  : स्त्री० [हिं० लड़ना] १. लड़ने की क्रिया या भाव। जैसे—पतंगों की लड़ंत पहलवानों की लडंत। २. लड़ाई-झगड़ा। ३. विरोधी दलों से होनेवाला मुकाबला या सामना।
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लडंता  : वि० [हिं० लडंत] [स्त्री० लडंती] १. कुश्ती आदि लड़ने वाला। जैसे—लडंता पहलवान। २. लड़ाई-झगड़ा करनेवाला।
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लड़  : पुं० [सं० यष्टि, प्रा० लट्ठि] [स्त्री० अल्पा० लड़ी] १. सीध में गुथी हुई या एक दूसरे से लगी हुई एक ही प्रकार की वस्तुओं की पंक्ति। माला। जैसे—मोतियों का लड़। सिकड़ी का लड़। २. रस्सी आदि के रूप में बटा हुआ लंबा खंड। जैसे—तीन लड़ का रस्सा। ३. कतार। पंक्ति। श्रेणी। ४. किसी के साथ घनिष्ठता या दृढ़तापूर्वक गुथे या मिले हुए होने की अवस्था या भाव। मुहावरा—(किसी के साथ) लड़ मिलना=मेल-मिलाप करना। मित्रता स्थापित करना। (किसी के) लड़ में रहना=गुट या दल में रहना। ५. दे० ‘लड़ी’।
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लड़इता  : वि० =लड़ैता। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लड़क  : पुं० हिं० लड़का का वह संक्षिप्त रूप जो उसे समस्त पदों के आरम्भ में लगने पर प्राप्त होता है। जैसे—लड़क-बुद्धि।
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लड़कई  : स्त्री० =लड़कपन। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लड़क-खेल  : पुं० [हिं० लड़का+खेल] १. बालकों का खेल। २. लड़कों के खेल की तरह का बहुत ही सहज या साधारण काम।
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लड़कपन  : पुं० [हिं० लड़का+पन] १. ‘लड़का’ होने की अवस्था या भाव। बाल्यावस्था। जैसे—वह लड़कपन से ही बहुत चतुर था। २. लडकों का-सा आचरण या व्यवहार, जिसमें बुद्धि का परिपाक न दिखाई देता हो। जैसे—तुम इतने बड़े हुए पर अभी तक तुम्हारा लड़कपन नहीं गया।
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लड़क-बुद्धि  : स्त्री० [हिं० लड़का+सं० बुद्धि] बालकों की-सी समझ। अपरिपक्व बुद्धि। अज्ञता। नासमझी।
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लड़क-बुध  : स्त्री० =लड़क-बुद्धि।
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लड़का  : पुं० [सं० लाड़िक] [स्त्री० लड़की] १. थोड़ी अवस्था का मनुष्य। वह जिसकी उमर कम हो। वह जो अभी तक युवक न हुआ हो। बालक। २. औरस नर संतान। पुत्र। बेटा। पद—लड़का बाला=संतान। बाल-बच्चा। लड़कों का खेल=बहुत ही छोटा सहज और साधारण काम। मुहावरा—लड़का जनना=नर संतान प्रसव करना।
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लड़काई  : स्त्री० =लड़कई (लड़कपन)। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लड़कानि  : स्त्री० =लडकपन। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लड़का-बाला  : [हिं० लड़का+सं० बाला] १. लड़का या लड़की। पुत्र और पुत्री दोनों अथवा इनमें से कोई एक औलाद। संतान। २. कुटुंब। परिवार।
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लड़किनी  : स्त्री० =लड़की। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लड़की  : स्त्री० [हिं० लड़का] १. पुरुष जाति का मादा बच्चा। बच्ची। विशेष—वृद्ध तथा प्रौढ़ स्त्रियों को छोड़कर शेष अवस्थावाली स्त्रियों के लिए भी इसका प्रयोग होता है। जैसे—(क) इस लकड़ी ने एम० ए० पास किया है। (ख) इस लड़की के दो बच्चे हैं। २. पुत्री। बेटी। जैसे—वह अपनी लड़की को साथ लेते गए हैं। ३. अल्पवयस्क या युवा नौकरानी।
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लड़कीवाला  : पुं० [हिं० लड़की+वाला (प्रत्यय)] १. वह जिसके यहाँ लड़की या लड़कियाँ हों। २. कन्या-पक्ष। ‘वर-पक्ष’ का विरुद्धार्थक। जैसे—लड़कीवालों से जो शर्ते बनता है वह लड़की को देते हैं।
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लड़केवाला  : पुं० [हिं०] विवाह संबंध में वर का पिता या उसका अभिभावक अथवा संरक्षक। वर-पक्ष।
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लड़कोरी (कौरी)  : वि० [हिं० लडका+औरी (प्रत्यय)] (स्त्री) जिसकी गोद में बच्चा हो। पुत्रवती।
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लड़खड़ाना  : अ० [सं० लड़=डोलना+खड़ा] [भाव० लड़खड़ाहट] चलते समय सीधे स्थित न रह सकने के कारण इधर-उधर झुक पड़ना। चलने में झोंका खाना। डगमगाना। डिगना। जैसे—तेज चलने में वह (या उसका पैर) लड़खड़ाया और वह गिरते-गिरते बचा। संयो० क्रि०—जाना। २. चलते समय डगमगा कर गिरना। झोंका खाकर नीचे आ जाना। ३. कोई काम करते समय किसी अंग का बीच में ठीक तरह से काम कर सकने के कारण इधर-उधर होना। विचलित होना। जैसे—(क) बोलने में जबान लड़खड़ाना। (ख) कुछ उठाते समय हाथ लड़खड़ाना।
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लड़खड़ाहट  : स्त्री० [हिं० लड़खड़ाना+आहट (प्रत्यय)] लड़खड़ाने की क्रिया या भाव। डगमगाहट।
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लड़खड़ी  : स्त्री० =लड़खड़ाहट। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लड़ना  : अ० [सं० रणन] [भाव० लड़ाई] १. आपस में शारीरिक बल का प्रयोग करते हुए एक दूसरे को घायल करने, चोट पहुँचाने या मार डालने के उद्देश्य से घात-प्रतिघात करना। लड़ाई करना। भिड़ना। जैसे—पशुओं या सैनिकों का आपस में लड़ना। २. आपस में एक-दूसरे को गिराने, दबाने, नीचे दिखाने आदि के लिए ऐसी क्रिया, आचरण या व्यवहार करना जिसमें शक्ति का प्रयोग होता हो। जैसे—कचहरी में मुकदमा लड़ना। ३. आर्थिक, बौद्धिक, शारीरिक आदि बलों का प्रयोग करते हुए विपक्षी या विरोधी को परास्त करने या हराने के लिए उपाय या क्रिया करना। जैसे—(क) शास्त्रार्थ के समय पंडितों का आपस में लड़ना। (ख) अखाड़े में पहलवानों का लड़ना। ४. अपने पक्ष या स्थापन करने के लिए अशिष्टतापूर्वक बातचीत या वाद-विवाद करना। झगड़ना। जैसे—ये लोग जरा-जरा सी बात पर रोज यों ही घंटों लड़ते रहते हैं। पद—लड़ना-भिड़ना। संयो० क्रि०—जाना।—पड़ना।—बैठना। ५. दो वस्तुओं का वेग के साथ एक दूसरे से जा लगना। टक्कर खाना। टकराना। भिड़ना। जैसे—रेलगाड़ियों का लड़ना, मोटर से बैलगाड़ी का लड़ना। ६. दो ऐसे अंगों का परस्पर रगड़ खाना जिनमें वस्तुतः कुछ दूरी होना चाहिए। जैसे—(क) टायर का रिम से लड़ना। (ख) जाँघों का लड़ना। ७. ऐसी स्थिति में आना, पहुँचना या होना जिसमें हार-जीत का प्रश्न हो अथवा निकट विरोधी परिस्थियों का सामना करना पड़ता हो। जैसे—(क) किसी काम में जान लड़ना। (ख) किसी बात में बुद्धि लडना। (ग) रोजगार में रुपये या जूए में माल लड़ना। ८. ऐसी स्थित में आना या पहुँचना कि ठीक तरह से बराबरी या सामना हो अथवा किसी प्रकार की अनुकूलता या समानता सिद्धि होती हो। जैसे—(क) किसी से आँखें लड़ना। (ख) एक ही बात से दूसरे की बात लड़ना। मुहावरा—हिसाब लड़ना= (क) जोड़, बाकी आदि का लेखा या हिसाब ठीक और पूरा उतरना। (ख) किसी काम या बात के लिए अनुकूल या उपयुक्त अवसर मिलना या सुभीता निकलना। ९. किसी जानवर का आकर काटना या डंक मारना। जैसे—उसे कुत्ता (या बिच्छू) लड़ गया है (पश्चिम)।
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लड़बड़ा  : वि० [अनु०] १. लटपटा। २. नपुंसक। २. ढीला-ढाला।
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लड़बड़ाना  : अ०=लड़खड़ाना। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लड़-बावर  : वि० [स्त्री० लड़-बावरी] लाड़-बावला। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लड़-बावला  : वि० [सं० लड़=लड़कों का सा+बावला] [स्त्री० लड़बावली] जिसमें अभी लड़कपन और नासमझी की बहुत सी बातें या लक्षण हों। निरा अल्हड़ या मूर्ख।
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लड़बौरा  : वि० [हिं० लड़-बोरी]=लड़बावला।
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लड़ाई  : स्त्री० [हिं० लड़ना+आई (प्रत्यय)] १. आपस में लड़ने की अवस्था, क्रिया या भाव। २. वह क्रिया या स्थिति जिसमें लोग आपस में मार-पीट करके दूसरों को घायल करने या मार डालने का प्रयत्न करते है। भिड़ंत। ३. वह स्थिति जिसमें विरोधी दलों या पक्षों के लोग विशेषतः सशस्त्र सैनिक एक दूसरे को मार डालने या घायल करने का प्रयत्न करते हैं। जैसे—राज्यों के सीमा क्षेत्रों में प्रायः लड़ाइयाँ होती रहती हैं। पद—लड़ाई का मैदान=वह स्थान जहाँ एकत्र होकर सैनिक युद्ध करते हों युद्ध-क्षेत्र। समर-भूमि। मुहावरा—लड़ाई पर जाना=योद्धा या सैनिक के रूप में रणक्षेत्र में युद्ध करने के लिए जाना। ४. ऐसी स्थिति जिमसें आपस में एक-दूसरे को दबाने या हटाने का प्रयत्न करते हों। जैसे—आज-कल दोनों भाई कचहरी की लड़ाई लड़ रहे हैं। ५. ऐसी स्थिति जिसमें आपस में अशिष्टतापूर्ण वाद-विवाद और कटु शब्दों का प्रयोग होता हो। तकरार। हुज्जत। जैसे—पंचायत (या सभा) में लोग बातें क्या करते थे, लड़ाई लड़ते थे। ६. ऐसी स्थिति जिसमें आपस में बहुत अधिक वैमनस्य और वैर-विरोध हो, तथा पारस्परिक सामाजिक व्यवहार आदि बन्द हों। जैसे—इधर महीनों से दोनों भाइयों में गहरी लड़ाई चल रही है। ७. किसी वस्तु पर अधिकार प्राप्त करने या अपना पक्ष ठीक सिद्ध करने के लिए होनेवाली वाद-विवादात्मक बल-परीक्षा या बल-प्रयोग। जैसे—हमें तो यही पता नहीं चलता कि आप लोगों में लड़ाई किस बात की है। पद—लड़ाई-झगड़ा, लडाई-भिड़ाई। ८. दो वस्तुओं का वेग के साथ एक दूसरी से जा लगना। टक्कर। (क्व०)
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लड़ाका  : वि० [हिं० लड़ना+आका (प्रत्यय)] [स्त्री० लड़ाकी] १. युद्ध में लड़नेवाला योद्धा। सिपाही। २. बात-चीत में या प्रायः सबसे लड़ाई-झगड़ा करनेवाला।
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लड़ाकू  : वि० [हिं० लड़ना] १. युद्ध में व्यवह्रत होनेवाला। लड़ाई में काम आनेवाला। जैसे—लड़ाकू जहाज। २. दे० ‘लड़ाका’।
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लड़ाना  : स० [हिं० लड़ना का प्रे०] १. किसी को या औरों को मारने-काटने या युद्ध करने में प्रवृत्त करना। २. कलह, लड़ाई-झगड़ा या विरोध में प्रवृत्त करना। जैसे—दोनों भाइयों को तुम्हीं लड़ा रहे हो। ३. पहलवानों का अपने शिष्यों को अभ्यास कराने के लिए अपने साथ कुश्ती लड़ाने में प्रवृत्त करना। जैसे—यह पहलवान रोज अखाड़े में बीसियों लड़को को लड़ाता था। ४. कौशल, बल, बुद्धि आदि की परीक्षा करने के लिए दो चीजों या जीवों को किसी प्रकार की प्रतिस्पर्धा या होड़ में प्रवृत्त करना। जैसे—पतंग, बटेर, मुरगा या मेढ़ा लड़ाना। ५. अपना कोई अंग दूसरे के उसी अंग के सामने लाकर बराबरी करना या उससे संबंध रखनेवाली किसी प्रकार की परीक्षा करना। जैसे—आँखें लड़ाना, पंजा लड़ाना ६. विकट परिस्थियाँ पार करने के लिए कौशल, चातुरी, बुद्धि आदि का प्रयोग करना। जैसे—(क) तरकीब या युक्ति लड़ाना। (ख) दिमाग या बुद्धि लड़ाना। ७. एक वस्तु को दूसरी से वेग या झटके के साथ मिलाना। टक्कर खिलाना। भिड़ना। ८. दो रेखाओं को एक दूरी से छुआना या टकराना। स० [हिं० लाड़=प्यार] लाड़-प्यार करना। दुलार करना। प्रेम से चुपकारना।
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लड़ायता  : वि० [स्त्री० लड़ायती]=लड़ैता। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लड़ी  : स्त्री० [हिं० लड़ का स्त्री० अल्पा०] १. सीध में गुथी हुई या एक दूसरे से लगी हुई एक ही प्रकार की वस्तुओं की पंक्ति। माला। जैसे—मोतियों की लड़ी। २. डोरी, रस्सी आदि की रचना में उन कई विभागीय तारों आदि में से प्रत्येक जिन्हें बटकर डोरी या रस्सी बनाई जाती है। ३. किसी काम चीज या बात का ऐसा क्रम, श्रृंखला या सिलसिला जो लगातार कुछ दूर तक चला चले। जैसे—(क) टीलों या पहाड़ियों की लड़ी। (ख) बातों की लड़ी। ४. फूलों की पतली गुथी हुई माला। दे० ‘लड़’।
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लड़ीला  : वि० =लाड़ला। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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लड़ैता  : वि० [हिं० लाड़=प्यार+ऐता (प्रत्यय)] [स्त्री० लड़ैती] १. जिसे बहुत लाड़-प्यार से पाला-पोसा गया हो। लाड़ला। २. प्यारा। प्रिय। ३. बहुत लाड़-प्यार के कारण जिसका आचरण और व्यवहार कुछ बिगड़ गया हो। पुं० [हिं० लड़ना] योद्धा।
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