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सामी  : पुं० [सं० साम (देश)] पुरातत्व के अनुसार प्राचीन साम (देखें) नामक भू-भाग के निवासी जिनके अन्तर्गत अरब, इब्रानी एसीरिया (या असुरिया) और फिनीशिया तथा बैबिलोन के लोग आते हैं। स्त्री० उक्त प्रदेश की प्राचीन भाषा जिसकी शाखाएँ आज-कल की अरबी, इब्रानी फिनिशिया और बैबिलोन आदि की भाषाएँ है। स्त्री०=शामी (छड़ी, डंडे आदि की) पुं०=स्वामी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)
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सामीची  : स्त्री० [सं०] १. वंदना। प्रार्थना। स्तुति। २. नम्रता। ३. शिष्टता।
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सामीचीन्य  : पुं० [सं० समीचीनी+ष्यञ्]=सामीचीनता।
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सामीप्य  : पुं० [सं० समीप+ष्यज्] १. समीपता। २. मुक्ति की चार अवस्थाओं में से एक जिसमें मुक्तात्मा ईश्वर से समीप होती है।
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सामीर  : पुं० [सं०]=समीर (पवन)।
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सामीर्य  : वि० [सं०] समीर संबंधी। समीर का। हवा का।
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